Viksit Bharat Conclave 2047: दिल्ली के न्यू महाराष्ट्र सदन में आयोजित Viksit Bharat @2047 Conclave में एजुकेशनिस्ट और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर सलोनी खन्ना ने भारत के विकास मॉडल में शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन News India 24×7 की तरन्नुम जहां शेख ने किया।
शिक्षा व्यवस्था पर ध्यान
सलोनी खन्ना ने मंच पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारत के विकसित होने की बात तो 2047 के लक्ष्य से जुड़ी है, लेकिन असली चुनौती अगले पांच साल की है। उन्होंने कहा कि “अगर आने वाले पांच वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने पर गंभीरता से काम नहीं हुआ, तो अगले 22 साल बाद भी भारत विकसित श्रेणी में नहीं पहुंच पाएगा।”
उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था ने परंपरागत डिग्री की उपयोगिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। “मैं खुद पीएचडी हूं, लेकिन आज डिग्री न रोजगार दिला रही है, न जरूरी स्किल। हम एक पोस्ट-डिग्री इकॉनमी में प्रवेश कर चुके हैं,” उन्होंने कहा।
शिक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी खामी
सलोनी ने भारतीय शिक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी खामी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत दुनिया का इकलौता देश है जहां इनफॉर्मल लर्निंग सबसे अधिक होती है, YouTube, WhatsApp, Instagram से सीखने का चलन तेजी से बढ़ा है। इसके उलट, तीन से पांच साल की कॉलेज डिग्रियों का वास्तविक मूल्य घटता जा रहा है।
उन्होंने चिंता व्यक्त की कि आज के माता-पिता यह भी नहीं जान पा रहे कि बच्चों को किस भविष्य, किस नौकरी या किस स्किल सेट के लिए तैयार करें, क्योंकि दुनिया “एक क्लिक में बदल रही है।” उनके अनुसार, आज विद्यार्थियों का सबसे बड़ा डर एडमिशन नहीं, बल्कि अनिश्चित भविष्य है।
अंत में उन्होंने कहा कि इस कन्फ्यूजन को खत्म करना मुश्किल है, लेकिन शिक्षा सुधार के माध्यम से इसे काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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