Gyanodaya Conclave : शिक्षा विभाग के विशेषाधिकारी और कृषि प्रोफेसर डॉ. सुनील दधीच ने कहा कि अगर हम शिक्षा की बात करें और उसमें पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण की चर्चा न हो, तो वह अधूरी रहती है। आज के समय में युवाओं को इन दोनों विषयों के महत्व को समझाना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जल और पर्यावरण कोई अलग विषय नहीं हैं, बल्कि ये हमारे चारों ओर मौजूद हैं और जीवन का आधार हैं। लेकिन उपभोक्तावादी संस्कृति की ओर बढ़ते हुए हम अपने परंपरागत जल स्रोतों को भूल गए हैं। नतीजा यह है कि पानी का स्तर लगातार गिरता जा रहा है।
डॉ. दधीच ने बताया कि राजस्थान देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 10 प्रतिशत है, लेकिन यहां केवल 1 प्रतिशत जल ही उपलब्ध है। जनसंख्या साढ़े पाँच करोड़ से ज्यादा है, ऐसे में पानी का दुरुपयोग भविष्य के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि जागरूकता की कमी के कारण हम जल के साथ-साथ पक्षियों और पशु-पक्षियों के संरक्षण में भी पीछे रह गए हैं। उन्होंने गिद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि नई पीढ़ी ने इसे शायद देखा भी नहीं होगा, जबकि कभी यह हमारे वातावरण का हिस्सा हुआ करता था।
बच्चों और युवाओं को जल और पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा देना अत्यंत आवश्यक…
राजस्थान में न्यूज़ इंडिया का ‘ज्ञानोदय’ कॉन्क्लेव
“जब तक हम शिक्षा के माध्यम से जागरूकता नहीं फैलाएंगे,
तब तक कोई भी अभियान स्थायी नहीं होगा”
: प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सुनील दधीच#GyanodayaConclave2025… pic.twitter.com/Jm3L8THAi6
— News India 24×7 (@newsindia24x7_) October 7, 2025
उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के पाठ्यक्रमों में पर्यावरण और जल संरक्षण से जुड़ी जानकारी को और विस्तार से शामिल किया जाना चाहिए। विज्ञान के विषय में पशु-पक्षियों और पारिस्थितिकी तंत्र की जानकारी जरूर दी जाती है, लेकिन इसे और गहराई से पढ़ाना समय की मांग है।
डॉ. दधीच ने कहा कि अगर बच्चों को बचपन से ही जल और पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा दी जाए, तो आने वाली पीढ़ियाँ प्रकृति को संजोने और बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।

