Rajasthan: ड्रग्स की तस्करी के खिलाफ पुलिस की सख्ती बढ़ने के साथ-साथ तस्कर भी नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। पहले जहां नाबालिग बच्चों के जरिए नशे की खेप पहुंचाने के मामले सामने आते थे, वहीं अब तस्कर पुलिस की नजरों से बचने के लिए महिलाओं का सहारा लेने लगे हैं। स्थिति यह है कि महिलाएं अब केवल छोटे स्तर पर नशे की पुड़िया बेचने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर लाखों रुपये के मादक पदार्थों की खेप लेकर सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय कर रही हैं।
कोटा और आसपास के मामलों ने बढ़ाई पुलिस की चिंता
कोटा और आसपास के इलाकों में सामने आए मामलों ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। पिछले पांच वर्षों में अवैध ड्रग्स तस्करी से जुड़े करीब 50 मामलों में 38 महिलाओं को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें कई महिलाएं ऐसी भी हैं, जो बार-बार गिरफ्तारी के बावजूद जेल से बाहर आने के बाद दोबारा इसी अवैध कारोबार में सक्रिय हो जाती हैं।
पुलिस से बचने के लिए महिलाओं को बनाया जा रहा रणनीतिक हथियार
तस्कर गिरोहों ने पुलिस जांच और नाकाबंदी से बचने के लिए महिलाओं को एक रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। उनका मानना है कि यदि वाहन में महिलाएं और पारिवारिक माहौल दिखाई दे तो पुलिस को कम संदेह होगा और जांच भी अपेक्षाकृत हल्की होगी।
इसी सोच के तहत महिलाएं पारिवारिक वेशभूषा में यात्रा करती हैं और परिवार के साथ घूमने-फिरने का आभास देती हैं। कारों में रखे मादक पदार्थों को घरेलू सामान या सामान्य बैगों में छिपाकर ले जाया जाता है। कई मामलों में महिलाएं खुद वाहन चलाती हैं ताकि किसी तरह का शक पैदा न हो।
जंगलों और सुनसान रास्तों का भी लिया जा रहा सहारा
हाल ही में कोटा ग्रामीण पुलिस ने एक ऐसे मामले का खुलासा किया, जिसने तस्करों की नई कार्यप्रणाली को सामने ला दिया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब 6.15 लाख रुपये मूल्य का 41 किलो डोडा चूरा बरामद किया और दो महिला तस्करों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार महिलाओं की पहचान पंजाब के लुधियाना निवासी परमजीत कौर और गुलशन कौर के रूप में हुई है। जांच में सामने आया कि दोनों महिलाएं मध्यप्रदेश से डोडा चूरा लेकर पंजाब जा रही थीं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि दोनों महिलाएं खुद कार चला रही थीं और मुख्य मार्गों की बजाय सुनसान तथा जंगलों से होकर गुजरने वाले रास्तों का इस्तेमाल कर रही थीं, ताकि पुलिस की निगरानी से बचा जा सके।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार दोनों महिलाएं काफी शातिर थीं। वे पुलिस की गतिविधियां देखकर पहले ही वाहन रोक देती थीं, जिससे उन पर तत्काल संदेह न हो। डोडा चूरा को पान मसाला के बैगों में भरकर रखा गया था, ताकि वह सामान्य सामान जैसा दिखाई दे।
कोटा ग्रामीण पुलिस ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर चेचट क्षेत्र के पास कार्रवाई करते हुए दोनों महिलाओं को गिरफ्तार किया।
पांच वर्षों में 38 महिला तस्कर गिरफ्तार
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में राजस्थान, पंजाब और मध्यप्रदेश से जुड़े करीब 50 मामलों में 38 महिला तस्करों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें कई महिलाएं आदतन अपराधी बन चुकी हैं और बार-बार गिरफ्तार होने के बावजूद इस अवैध धंधे से बाहर नहीं निकल रही हैं।
कोटा शहर की गुड्डी, शाहिदा, संजुबाई और ममताबाई जैसी महिला तस्कर विभिन्न थाना क्षेत्रों में कई बार गिरफ्तार हो चुकी हैं। वहीं पंजाब की बलजीत कौर, जरनैल कौर और करतार कौर के अलावा जोधपुर की पूजा को भी लाखों रुपये कीमत के कई क्विंटल मादक पदार्थों के साथ पकड़ा जा चुका है।
बदल रहा है नशा तस्करी का चेहरा
विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों का मानना है कि मादक पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क अब पहले की तुलना में अधिक संगठित और पेशेवर हो गया है। तस्कर जानते हैं कि सामान्य परिस्थितियों में परिवार के साथ यात्रा कर रही महिलाओं पर कम संदेह किया जाता है। इसी कमजोरी का फायदा उठाते हुए वे महिलाओं को आगे कर रहे हैं।
पुलिस ने बढ़ाई निगरानी और अभियान
कोटा शहर और ग्रामीण इलाकों में लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद पुलिस ने अपनी निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी है। नाकाबंदी, खुफिया सूचना तंत्र और विशेष अभियानों के जरिए ऐसे नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तस्कर चाहे किसी भी रूप में सामने आएं, कानून की पकड़ से बच पाना संभव नहीं होगा।
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